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सर्दी, खांसी, साँस में तकलीफ़........ कहीं निमोनिया तो नहीं (भाग 2)

 निमोनिया (भाग-2)

निमोनिया से निदान 




निमोनिया से ग्रसित कोई व्यक्ति जब डॉक्टर के पास जाता है तो डॉक्टर सबसे पहले अपने स्टेथोस्कोप की मदद से आपके फेफड़े की आवाज को सुनते हैं और उसके बाद बीमारी की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित परीक्षणों का सुझाव दे सकते हैं-

1. Chest एक्स-रे-
इस एक्सरे से डॉक्टर को पता चलता है कि आपके छाती (Chest) और फेफड़े में कहां और कितनी सूजन है।

2. Blood culture-
इस परीक्षण में रक्त के नमूने का उपयोग करके संक्रमण का पता लगाते हैं। साथ ही आपके बीमारी का भी पता लगाते हैं।

3. Sputum culture-
इसमें आपके बलगम/ कफ़ (Phlegm) का नमूना लेकर लैब में भेजते हैं और संक्रमण के कारणों का पता लगाते हैं।

4. Pulse Oximetry-
यह हमारे ब्लड में ऑक्सीजन की मात्रा को मापता है।ऑक्सीमीटर को उंगली में लगाने पर, यह एक सेंसर की मदद से हमारे फेफड़े द्वारा ब्लड सरकुलेशन के माध्यम से, ऑक्सीजन लेने की पूरी स्थिति की जानकारी देता है।
इनके अलावा सिटी स्कैन (CT Scan), फ्लूड सैंपल (Fluid Sample) तथा ब्रोंकोस्कॉपी (Bronchoscopy) के माध्यम से भी निमोनिया का पता लगाया जाता है।

फ्लूड सैंपल तथा ब्रोंकोस्कॉपी परीक्षण का उपयोग निमोनिया की गंभीर स्थिति की जांच में किया जाता है। फ्लूड सैंपल में जहां डॉक्टर आपके चेस्ट के भीतर निडिल के माध्यम से फ्लूड को बाहर निकालकर उसका परीक्षण करते हैं, तो वही ब्रोंकोस्कॉपी में आपके गले और लंग्स के बीच एक कैमरे के माध्यम से संक्रमण का पता लगाया जाता है। ब्रोंकोस्कॉपी का प्रयोग उस दौरान किया जाता है, जब बीमार व्यक्ति पर एंटीबायोटिक्स का असर अच्छी तरह से नहीं हो पा रहा हो।

बचाव-

निमोनिया के परीक्षण के पश्चात डॉक्टर आपके बीमारी की गंभीरता एवं उसके प्रकार को देखते हुए दवाइयों का सुझाव देते हैं। ज्यादातर मामलों में डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक दवाइयों का डोज देते हैं जिनका एक निश्चित कोर्स (अवधि) होता है। भले ही आप कुछ ही गोलियां खाने के पश्चात स्वस्थ महसूस करने लगे, परंतु आपको इन एंटीबायोटिक्स का कोर्स पूरा करना चाहिए। अगर आप कोर्स पूरा नहीं करते हैं तो हो सकता है कि भविष्य में यह बीमारी आपके शरीर के लिए फिर से खतरा पैदा कर सकती है।

हम सब पहले ही जान चुके हैं कि निमोनिया के भी कई प्रकार हैं जैसे कि फंगल निमोनिया या वायरल निमोनिया आदि। और कई बार एंटीबायोटिक दवाइयां इन वायरस पर कुछ खास असर नहीं करती हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर आपको अलग दवाइयां दे सकते हैं, हालांकि वायरल निमोनिया घर पर भी ठीक हो जाते हैं। जबकि फंगल निमोनिया से लड़ने के लिए डॉक्टर एंटी फंगल या कुछ अन्य दवाइयां भी दे सकते है।




निमोनिया से बचाव का एक और तरीका है जिसे हम वैक्सीनेशन के नाम से जानते हैं और अपने डॉक्टर की सलाह से हम इन वैक्सीन को लगवा सकते हैं। कुछ वैक्सीन की चर्चा करें तो-
1.Pneumovax 23
2.Prevnar 13  
3.Flu vaccine
4.Hib vaccine

यह वैक्सीन निमोनिया से बचाव में काफी असरदार माने जाते हैं तथा हमें ये टीके लगवाकर अपनी सुरक्षा का इंतजाम जरूर करना चाहिए।

कुछ घरेलू उपाय-





निमोनिया से बचने के लिए आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी कि इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत रखें और इसके लिए आपको पौष्टिक आहार तथा प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की नींद लेने की जरूरत है। निमोनिया के कुछ लक्षण दिखने पर गर्म पानी से गार्गल, काढ़ा, अदरक वाली चाय, गर्म कॉफी, सूप, गर्म पानी आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा आप रोज व्यायाम करें तथा साफ-सफाई पर भी जरूर ध्यान दें। और सबसे जरूरी बात कि आप सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू जैसे धूम्रपान से दूर रहे जो आपके फेफड़ों को और भी खराब कर सकता है।





कुल मिलाकर कहा जाए तो अगर आप को सांस लेने में दिक्कत हो रही हो या हाई फीवर हो अथवा सीने में दर्द या लगातार खांसी जैसी समस्याएं आ रही हो तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए तथा उनके द्वारा सुझाए गए उपायों को अपनाना चाहिए।
(निमोनिया के लक्षण, उसके प्रकार एवं रिस्क फैक्टर
 आदि के संबंध में जानने के लिये आप इस आर्टिकल 
के पहले भाग को पढ़ सकते हैं

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