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कोविड के दौर में प्रेग्नेंट महिलाएं कैसे रखें अपना ख्याल ?


                      


भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण काफी फैल चुका है और बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी लोग इसके शिकार हो रहे हैं। संक्रमण के इस दौर में हम सब महसूस कर रहे हैं कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष, युवा वर्ग पर कोरोना वायरस का असर काफी ज्यादा है। ऐसे में गर्भवती यानी कि प्रेग्नेंट महिलाओं को अपना खास ध्यान रखने की जरूरत है। आजकल के दौर में हम सब जानते हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और थायराइड जैसी बीमारियां आम हो गई हैं। साथ ही प्रेगनेंसी के पीरियड में उनमें न्यूट्रिशन व खून की कमी तथा हार्मोनल बदलाव जैसी कई समस्याएं भी देखने को मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता अर्थात इम्यून सिस्टम का कमजोर होना स्वाभाविक है और वे किसी भी तरह के इंफेक्शन के प्रति काफी संवेदनशील हो जाती हैं 


जाहिर है कि ऐसे संवेदनशील दौर में गर्भवती महिलाओं को अपने साथ-साथ अपने गर्भ में पल रहे बच्चे का भी ध्यान रखना होता है और इसीलिए यह बहुत जरूरी है कि वें अपने खानपान का विशेष ध्यान रखें। आज के इस लेख में हम प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के मन में उठ रहे तमाम सवालों का जवाब देने की कोशिश करेंगे।


सबसे पहला सवाल तो यही है कि कोरोना वायरस है क्या और यह कैसे फैल सकता है? 

यह वायरस जिसका आधिकारिक नाम कोविड-19 है, कोरोनावायरस परिवार से संबंधित है। इस परिवार का संबंध सार्स और मर्स जैसी बीमारियों से भी जुड़ा हुआ है। इस वायरस परिवार से संक्रमित लोगों में ज्यादातर श्वसन संबंधी एवं सर्दी, ज़ुकाम से संबंधित समस्याएं देखने को मिलती हैं। अगर कोविड-19 की बात करें तो विशेषज्ञों का मानना है कि इस वायरस के संक्रमण संबंधी शुरूआती घटनाओं की जानकारी चीन के वुहान शहर से देखने-सुनने को मिली है और उसके बाद यह संक्रमण वैश्विक अर्थात पेंडेमिक बन चुका है। आज लॉकडाउन, सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनिटाइजेशन जैसे शब्द हम सबके जीवन में आम हो गए हैं जो इसी महामारी के देन कहे जा सकते हैं।
                                


अगले सवाल के तौर पर अगर हम इस वायरस के प्रसार या फैलाव के कारणों को देखें तो 

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किसी संक्रमित व्यक्ति के पास कितनी देर रहे या उससे कितना संपर्क में आए हैं। साथ ही उस व्यक्ति के खासने या छींकने के कारण जो ड्रॉपलेट्स का प्रसार हुआ वह भी इस संक्रमण के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है। अभी हाल ही में लैंसेट जर्नल में छपी रिपोर्ट की माने तो यह वायरस अब एयरबोर्न हो चुका है अर्थात हवा के माध्यम से भी इसके फैलने की आशंका काफी बढ़ चुकी है। इसके अलावा लोगों द्वारा बार-बार अपने चेहरे को छूना, अपनी आंखों को स्पर्श करना भी इस वायरस के फैलाव का कारण बनता जा रहा है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति से संपर्क में आई हो, जिसे सर्दी, खाँसी, तेज बुखार हो तो आपके भीतर भी इस वायरस से संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है और यह संक्रमण आपके तथा आपके होने वाले बच्चे के लिए गंभीर भी हो सकता है।

हालांकि यह राहत वाली बात है कि अभी तक प्रेग्नेंट महिलाओं और उनके बच्चों में इस वायरस के संक्रमण की दर काफी कम देखने को मिली है। मां से बच्चे तक होने वाले वर्टिकल ट्रांसमिशन की प्रक्रिया के तहत वायरस का गर्भ में पल रहे बच्चे तक प्रसार होने के संबंध में रिसर्च अभी भी प्रक्रियाधीन हैं और इस विषय में प्रमाणिक रिपोर्ट का आना अभी भी बाकी है।                    फिर भी प्रेग्नेंट महिलाओं को इस दौर में काफी सतर्कता और सावधानी से रहने की जरूरत है। अगले कुछ प्वाइंटों में हम इन्हीं बातों का जिक्र करेंगे कि गर्भवती महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  • प्रेग्नेंट महिलाएं भीड़भाड़ वाली जगहों पर न जाएं तथा घर में भी मास्क लगाकर रहे।
  • जब तक बहुत जरूरी न हो आप बाहर ना निकले और न ही किसी बाहरी व्यक्ति के संपर्क आएं। 
  • अगर किसी कारणवश बाहर निकलना ही पड़े तो मुंह पर डबल मास्क पहनकर ही निकले। गवर्नमेंट की नई गाइडलाइन के मुताबिक अगर आप कपड़े वाला मास्क तथा सर्जिकल मास्क का इस्तेमाल करती हैं तो पहले सर्जिकल मास्क पहने और उसके ऊपर कपड़े वाला मास्क लगाएं।
  • इसके अलावा हाथ को 20 सेकंड तक साबुन से धोएं या अच्छे से सेनीटाइज करें।
  • यात्रा के दौरान सार्वजनिक वाहनों जैसे कि बस, ट्रेन या मेट्रो आदि के प्रयोग से बचें और 2 गज की दूरी तथा सोशल डिस्टेंसिंग जैसे प्रोटोकॉल का भी ध्यान रखें।
  • शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आपको सतर्क रहने के साथ-साथ 7 से 8 घंटे की नींद लेना भी जरूरी है और अपने डाइट में मौसमी फल और हरी सब्जियों को अधिक से अधिक शामिल करें।
  • अगर प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण के कोई भी लक्षण नजर आते हैं तो सबसे पहले खुद को आइसोलेट करें तथा अपने कमरे में वेंटिलेशन का प्रॉपर ध्यान रखें। साथ ही अपना टेस्ट भी करवाएं तथा रिपोर्ट आने का इंतजार करने के बजाए विटामिन सी, डी, जिंक तथा हाइड्रेशन का पूरा ध्यान देना आरंभ कर दें। 
  • रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर अपने डॉक्टर से सलाह लें और उनके द्वारा सुझाए गए दवाइयों का ही इस्तेमाल करें।
  • सबसे जरूरी बात सदैव पॉजिटिव रहे। इस पॉजिटिविटी का असर आपके बच्चे तक भी होगा। घर पर ही आप प्राणायाम, योगाभ्यास जैसे एक्टिविटीज को करती रहे और अपने आप को प्रोडक्टिव एवं पॉजिटिव कार्यों में व्यस्त रखें।









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