विटामिन डी की कमी का कारण -

1. यदि आप शाकाहारी (pure vegetarian) हैं, या खुद को सूर्य की रोशनी से दूर रखते हैं, तो जाहिर है आपमें विटामिन डी-3 की कमी हो सकती है।
2. अगर आप मोटापे का शिकार हैं, तो आपको भीतर विटामिन डी की कमी हो सकती है। ज्यादा फैट( वसा) होने की वजह से विटामिन डी, हमारे ब्लड में आसानी से अवशोषित नहीं हो पाता। अतः जितना आपका बॉडी मास इंडेक्स ज्यादा होगा, उतना आपके शरीर में विटामिन डी की कमी होगी।
3. यदि आपकी त्वचा सांवली या गहरे रंग वाली है, तो गोरे रंग वालों की तुलना में आपकी त्वचा का मेलानिन सूर्य की किरणों को शरीर में प्रवेश करने से रोकता है तथा शरीर में विटामिन डी बनने की प्रक्रिया को भी धीमा करता है। डार्क स्किन वालों को विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए धूप में ज्यादा देर तक रहना पड़ता है। साथ ही अधिक उम्र वाले बुजुर्गों में विटामिन डी का खतरा बहुत अधिक रहता है।
4. टी बी (tuberculosis) के मरीजों में विटामिन डी की कमी हो सकती है।
5. हमारी हड्डियों के विकास के लिए कैल्शियम और विटामिन डी-3 की आवश्यकता होती है। हमारी किडनी कैल्शिटरोल (Calciterol) नामक एक हार्मोन उत्पादित करती है। यह हार्मोन हड्डियों की, ब्लड से सही मात्रा में कैल्शियम लेने में मदद करता है। अगर आपकी किडनी सही तरह से काम नहीं करेगी तो आपकी हड्डियां भी कमजोर पड़ने लगेगी।
6. अगर आप सही मात्रा में अपने आहार में विटामिन डी न ले रहे हो।
विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग-
- शरीर के किसी भी हिस्से की हड्डियों में दर्द हो सकता है।
- शरीर के रक्त में विटामिन डी का स्तर कम होने से रिकेट्स नामक बीमारी हो सकती है। इस कमी के कारण बच्चों का शरीर सीधा न हो कर आर्क शेप में मुड़ जाता है, हालांकि अब यह समस्या लगभग न के बराबर ही देखने-सुनने को मिलती है।
- बच्चो में अस्थमा होना।
- हृदय रोग की समस्या का बढ़ना।
- कैंसर
- वयस्कों में हड्डियाँ कमजोर होने से ऑस्टियोमाइलाइटिस (Osteomyelitis) नामक बीमारी हो सकती है। साथ ही हड्डियां के कमजोर होने तथा हड्डियों व मांसपेशियों में दर्द का खतरा भी बढ़ जाता है।
विटामिन डी की कमी को पूरा करने का उपाय-
1. सूर्य की रोशनी -
ज्यादातर लोग यही सोचते है कि वो किसी न किसी तरह धूप के संपर्क में आ जाते हैं तो उनमें विटामिन डी की कमी नहीं हो सकती, लेकिन यह सोच गलत है। धूप विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है, परंतु इसे सही समय पर लेना चाहिए। धूप लेने का सबसे अच्छा वक्त सुबह 9 बजे से पहले और शाम 4 बजे के बाद है। अगर आपको धूप में जाने से सर दर्द , टैनिंग या रैशेस होने की शिकायत है तो पहले आप एक गिलास पानी पी लें और उसके बाद बाहर निकले। इससे काफी हद तक आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा। 15 से 20 मिनट के लिए धूप लेना काफी है। आप चाहे तो धूप में सूर्यनमस्कार भी कर सकते हैं। यदि आपने हफ्ते में एक या दो बार भी नियमित रूप से धूप ले लिया तो आपको कभी भी विटामिन डी की कमी नहीं होगी। साथ ही आप खुद को ऊर्जावान एवं प्रसन्न महसूस करेंगे, आपका ब्रेन शार्प होगा और आपके आंखों की रोशनी भी बढ़ेगी। इसके अलावा आपका स्किन भी ग्लो करेगा तथा बीमारियां आपसे दूर भागेंगी।
2- आहार -
दूध, मशरुम, घी, पनीर, फिश, एग योल्क, फोर्टीफाइड डेयरी प्रोडक्ट, अनाज (Grain), संतरा आदि विटामिन डी के अच्छे स्रोत है। कैल्शियम युक्त भोजन को प्राथमिकता दें।
3- सप्लीमेंट -
बाजार कई तरह के विटामिन डी के मेडिसिन उपलब्ध हैं, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के, आपको कभी भी इनका सेवन नहीं करना चाहिए। आप कोशिश करें कि सूर्य की रोशनी में प्राकृतिक तरीके से विटामिन डी की कमी को पूरा करें। यदि आपको सप्लीमेंट के तौर पर विटामिन डी को लेना ही पड़े, तो आप उसे ऐसे आहार के साथ ले जिसमें फैट अधिक हो; इससे विटामिन डी शरीर में अच्छे से अवशोषित होगा।
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