हम सब जानते हैं कि कोरोना 2.0 यानी कोरोना की नई लहर ने लोगों की सांसो की रफ्तार को धीमा कर दिया है और यह संक्रमण पूरे देश में बेकाबू हो गया है। ऐसे में हमारा आज का विषय उस यंत्र पर आधारित है जिसकी मदद से हम अपने शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा का पता लगाते हैं। जी हां मैं बात कर रही हूं- ऑक्सीमीटर की और इसी के साथ-साथ आज हम इस आर्टिकल में एबीजी अर्थात आर्टरियल ब्लड गैस (Arterial blood gas) तथा स्मार्ट वॉच के बारे में भी चर्चा करेंगे जोकि ऑक्सीजन लेवल जानने में हमारे लिए उपयोगी है।

दरअसल इन यंत्रों की मदद से हम घर पर ही अपने ब्लड में ऑक्सीजन की मात्रा को आसानी से जान सकते हैं जोकि कोरोना संक्रमित व्यक्ति के लिए बहुत जरूरी है। डॉक्टरों और विशेषज्ञों की माने तो यदि हम समय-समय पर अपने ऑक्सीजन लेवल का परीक्षण करते रहे और उसका ध्यान रखें तो हमें अस्पताल जाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी तथा होम आइसोलेशन में रहते हुए हम अपने घरेलू प्रयासों द्वारा इस बीमारी से मुक्ति पा लेंगे। साथ ही हमें ऑक्सीमीटर की रीडिंग से पता चल सकता है कि कब हमारे मरीज को हॉस्पिटल में दाखिल करने की आवश्यकता है और कब नहीं! यानी सही समय पर ऑक्सीजन की मात्रा को जांच कर हम जरूरतमंद लोगों की जान भी बचा सकते हैं।
यहां पर इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि हमारे ऑक्सीमीटर की रीडिंग में कुछ कमी भी हो सकती है, जैसे कि इसकी रीडिंग में 2% का उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है जिसे एरर विंडो कहा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो पेशेंट के वास्तविक ऑक्सीजन लेवल में 2 पॉइंट की कमी या बढ़ोतरी यानी वेरिएशन का मिलना इस यंत्र की एक सीमा रेखा है। इसके बावजूद यह यंत्र हमारी ऑक्सीजन रिकॉर्ड को जानने और रखने का एक महत्वपूर्ण जरिया है।
हमारे ऑक्सीमीटर में ऑक्सीजन लेवल के उतार-चढ़ाव आने पर हमें सिक्स (6) मिनट वॉक थ्योरी को अपनाना चाहिए अर्थात कमरे में ही 6 मिनट वॉक करने के पश्चात, एक बार फिर से अपने ऑक्सीजन लेवल की जांच करें और उसके बाद भी अगर ऑक्सीजन का लेवल एक तय सीमा से ज्यादा या कम हो रहा हो तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
वैसे तो ऑक्सीमीटर का उपयोग करना बहुत आसान है लेकिन फिर भी हमें इस उपकरण का उपयोग करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए जैसे कि हमारे उंगलियों के नाखून बहुत लंबे ना हो, साथ ही उन पर कोई डार्क नेलपालिश भी नहीं लगी होनी चाहिए क्योंकि इनके वजह से ऑक्सीमीटर की रीडिंग गलत आ सकती है। इसलिए उपयोग से पहले आप अपनी नेलपॉलिश हटा लें फिर इस डिवाइस का इस्तेमाल करें।
इसके अलवा ठंडे तापमान में भी ऑक्सीमीटर की रीडिंग अक्सर गलत हो जाती है, इसलिए हाथ ठंडे ना हो इस बात का भी ध्यान रखें।
आर्टरियल ब्लड गैस (Arterial blood gas)- यह एक ब्लड टेस्ट है जिससे हमें ब्लड में ऑक्सीजन का पता चलता है। यह टेस्ट हमारे खून में उपस्थित अन्य गैसों तथा पीएच लेवल का भी पता बताता है। इसकी मदद से यह भी पता लगाया जा सकता है कि हमारे फेफड़े, ऑक्सीजन को हमारे खून में अच्छी तरह से पहुंचा पा रहे हैं या नहीं! इसके अलावा वो कार्बन डाइऑक्साइड को भी ठीक तरह से बाहर निकाल रहे हैं या नहीं। कुल मिलाकर एबीजी द्वारा फेफड़ों की जांच करके और हमारे रक्त में ऑक्सीजन तथा मेटाबॉलिज्म संबंधी विकारों का पता लगाया जा सकता है। इस परीक्षण में डॉक्टर हमारे नस (veins) की जगह धमनी से ब्लड लेते हैं।
स्मार्ट वॉच (Smart Watch)- अपने ऑक्सीजन लेवल और फिटनेस लेबल को जांचने का एक नया फैंसी तरीका स्मार्ट वॉच भी है जोकि हेल्थ कॉन्शियस लोगों के बीच काफी प्रचलित भी है। हमारे ये आधुनिक गैजेट भी उसी सेंसर तकनीक का प्रयोग करते हैं जो ऑक्सीमीटर में लगा होता है। वैसे तो ऑक्सीजन मॉनिटर करने के लिए आधिकांश लोग ऑक्सीमीटर का ही उपयोग कर रहे हैं लेकिन हर किसी के घर में ऑक्सीमीटर उपलब्ध नहीं होता। ऐसे में स्मार्टवॉच का विकल्प भी अच्छा है। इसका परिणाम भी पूर्णत: सटीक नहीं होता है लेकिन इसकी मदद से आपको अपने ऑक्सीजन लेवल, कैलोरी बर्न तथा पल्स रेट जैसी चीजों का अंदाज़ा लग जाता है।
कितना होना चाहिए ब्लड में ऑक्सीजन का लेवल-
अब हम यह भी जान लेते हैं कि हमारे रक्त में ऑक्सीजन का सही स्तर क्या होता है अथवा क्या होना चाहिए। एक स्वस्थ व्यक्ति के ऑक्सीजन का सेचुरेशन लेवल 95 से 100 फीसदी के बीच में होनी चाहिए। साथ ही 94 फीसद से कम ऑक्सीजन लेवल की स्थिति को हाइपॉक्सेमिया (Hypoxemia) कहा जाता हैं। इस स्थिति में शरीर के टिश्यू और ऑर्गंस (organs) में कॉम्प्लिकेशन आ सकती है। जबकि ऑक्सीमीटर की रीडिंग में SpO2 लेवल का 90 से नीचे होना एक खतरे का सूचक है जो आपको यह बताता है कि आपको मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत है और अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करने की आवश्यकता है। इसके अलावा इस रीडिंग का 90 से 94 के बीच होना आपको अलर्ट करता है कि आप अपने ऑक्सीजन लेवल का समय-समय पर परीक्षण करते रहे।
अगर हम Arterial blood gas की बात करे तो इस टेस्ट के मुताबिक एक स्वस्थ फेफड़े का ऑक्सीजन लेवल 80 से 100 मिलीमीटर (mmHg) के बीच होता है।
यदि आपका ऑक्सीजन लेवल कम हो तो क्या होगा!!
यदि हमारे शरीर का ऑक्सीजन लेवल कम होने लगे तो हमारे शरीर में कुछ लक्षण (symptom) दिखाई देने लगते हैं, जैसे कि - सीने में दर्द (Chest pain), सांस लेने में तकलीफ होना, उलझन होना, सर दर्द होना, धड़कन का तेज होना (Rapid heartbeat) आदि। यदि लगातार आपका ऑक्सीजन लेवल कम होने लगे तो आपमें सायनोसिस (Cyanosis) के सिम्पटम भी दिख सकते हैं। सायनोसिस होने पर हमारे होंठ (Lips), नाखून, मुख जैसे पतले स्किन नीले-बैंगनी पड़ने लगते हैं। ऐसे लक्षण आने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या करें:
घर पर अपने ऑक्सीजन लेवल की रेगुलर मॉनिटरिंग के साथ-साथ आपको ऑक्सीजन थेरेपी या प्रोन ब्रीदिंग (Prone-Breathing) जैसी तकनीक का भी इस्तेमाल करना चाहिए जिससे आपके ऑक्सीजन लेवल में सुधार आ सके। इसके अलावा आप अनुलोम-विलोम तथा प्राणायाम जैसे योग्य अभ्यास करके भी अपने ऑक्सीजन लेवल को ठीक कर सकते हैं। अगर इन सबके बावजूद आपके ऑक्सीजन स्तर में सुधार ना हों तो आप तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। साथ ही अगर आपको पहले से कोई रेस्पिरेटरी समस्या है या आप बुज़ुर्ग हैं तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
कुछ ऐसे लोग जो पहले से ही अस्थमा, एनीमिया, हृदय संबंधी किसी रोग, पलमोनरी एंबॉलिज्म (pulmonary embolism), फेफड़े संबंधी समस्या व सीओपीडी आदि जैसी समस्याओं से जूझ रहे हो उनमें ऑक्सीजन लेवल की समस्या भी आ सकती है। ऐसे में उन्हें अपना खास ध्यान रखने की जरूरत है।
कुल मिलाकर कहा जाए तो आज कोरोना की वजह से ऑक्सीमीटर रखना हर घर में जरूरी हो गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर हम अपना ऑक्सीजन लेवल माप सके और खुद को घर में आइसोलेट कर सके। आपको यह ऑक्सीमीटर किसी भी मेडिकल शॉप पर या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिल जाएगा। यह अलग-अलग ब्रांड के मिलते हैं और कुछ सौ से लेकर हजार तक की रेंज में आपको मिल जाएंगे। अभी कुछ दिनों से मार्केट में ऑक्सीमीटर की कालाबाजारी संबंधी खबरें भी सुनने को मिल रही है जो काफी निराशाजनक है। मेरी समझ से यह एक जीवन रक्षक उपकरण है जो सभी के लिए अफोर्डेबल कीमत पर उपलब्ध होनी चाहिए।
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