एक दौर था जब मशहूर शायर शहरयार ने लिखा था, 'सीने में जलन आंखों में तूफ़ान सा क्यों है, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है'। अगर यह गीत आज के दौर में लिखा जाता तो इसमें शायद एक परिवर्तन जरूर होता कि यह जलन और तूफान दोनों ही आंखों में समाया दिखता। माफ कीजिएगा एक बड़े शायर के इमैजिनेशन को नकारात्मक रूप में पेश करने का मेरा कोई इरादा नहीं है, यह सिर्फ आपको सावधान करने के लिए है ताकि आप अपनी आंखों की देखभाल करें। आज के पर्यावरण प्रदूषण और स्क्रीन टाइम की बढ़ोतरी ने हम सबकी आंखों में जलन, इरिटेशन, लाल होने जैसी समस्याओं को काफी बढ़ा दिया। ऐसे में हमारा आज का यह आर्टिकल आपकी आंखों से जुड़ी समस्याओं पर ही आधारित है।
आंखों में जलन के लक्षण - आंखों में जलन शरीर में मौजूद किसी समस्या या बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। आमतौर पर आँखों का जलन अकेला नहीं होता है बल्कि हमारे शरीर में कोई अन्य बीमारी भी हो सकती है। आंखों में जलन व इससे संबंधित समस्याओं के लक्षण कुछ इस प्रकार दिखाई दे सकते हैं-
1. आंखों का लाल होना। 2. आंखों में खुजली होने। 3. आंखों में दर्द के साथ जलन होना। 4. नाक और गले में बलगम जमना। 5. आंखों की रोशनी कम होना या धुंधला दिखना। 6. चमकती रोशनी दिखाई देना। 7. सुखी या गीली आँखें। 8. छींक आना या नाक बहना।
ध्यान रहे कि अगर आप देर रात तक जगते हैं, तो आपकी समस्या और गंभीर हो सकती है। इसलिए बेहतर होगा आप पर्याप्त नींद लें, नहीं तो आंखों संबंधी समस्या बार-बार होने लगेंगी।
जलन के कारण- 1. एलर्जी- आंखों में खुजली होना मतलब आंखों में एलर्जी होना। कभी-कभी यह खुजली गले, नाक, फेफड़े या त्वचा पर भी होने लगती है। आंखों में जलन और छींक अक्सर एक साथ होते हैं। इस एलर्जी को कंजंक्टिवाइटिस कहते हैं।
2- कंप्यूटर और मोबाइल - यदि आप ज्यादा समय तक मोबाइल या लैपटॉप के स्क्रीन के सामने बैठते हैं तो आपके आंखों पर जोर पड़ता है, जिससे आंखों में जलन पैदा हो सकती है।
3- पर्यावरणीय कारक- हम रोजाना गर्मी, धूल, हवा और सूर्य की रोशनी के संपर्क में आते हैं। इससे पर्यावरण में मौजूद छोटे-छोटे कण (पार्टिकुलेट मैटर), जहरीले रसायन, साबुन, शैम्पू के झाग, परफ्यूम, स्विमिंग पूल के क्लोरिन युक्त पानी आदि से हमारे संपर्क होता है, जो हमारी आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं।
4- लेंस- आप अगर लंबी अवधि से कांटेक्ट लेंस पहन रहे हो तथा अपने आंखों की ठीक से सफाई न कर पा रहे हैं तो इससे भी आंखों में समस्या उत्पन्न हो सकती है।
5- आंखों के रोग- अगर आपकी आंखों में किसी प्रकार की तकलीफ हो तो यह संक्रमण का संकेत होता है। इसके अलावा शरीर के किसी अन्य हिस्से में संक्रमण होने से भी आंखों में जलन हो सकती है।
आंखों में जलन से बचाव -
1- अपने कंप्यूटर स्क्रीन से कम से कम 20 से 25 इंच की दूरी पर रहे। 2- अगर आप कंप्यूटर पर काम करते हैं तो बीच- बीच में काम से ब्रेक भी जरूर लें। 3- आंखों में जलन हो तो मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल कम करें। 4 - बहुत तेज रोशनी या चमक वाली लाइट्स का प्रयोग ना करें। 5- एडजस्टेबल चेयर का इस्तेमाल करें ताकि आप आपने स्क्रीन के हिसाब से बैठना adjust कर पाएं। 6- मोबाइल का इस्तेमाल करते समय आई कंफर्ट मोड तथा कंप्यूटर का इस्तेमाल करते समय ग्लेयर फिल्टर का उपयोग कर सकते हैं।
आंखों की देखभाल- 1. आंखों में जलन होने पर ठंडे पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं अथवा किसी कॉटन के कपड़े में बर्फ को लपेट कर थोड़ी देर सिकाई कर सकते हैं। 2. आंखों पर कटे हुए खीरे का भी उपयोग कर सकते हैं। 3. आंख ड्राई होने पर उसमें नमी लाने के लिए आप विशेष आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। 4. धूप या प्रदूषण से बचने के लिए आप चश्मे का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। 5. इसके अलावा खाने में हरी सब्जियों का जो विटामिन ए से युक्त होती हैं तथा संतुलित आहार का उपयोग करें। 6. अगर आप चश्मा पहनते हैं तो हर 6 से 8 महीने पर अपनी आंखों की जांच कराएं तथा लेंस संबंधी किसी समस्या को लेकर अपने डॉक्टर (Ophthalmologist) से संपर्क करें। 7. गर्मियों के मौसम में सनस्क्रीन हर कोई लगाता हैं। हो सकता है कि सनस्क्रीन लगाने पर आपकी आंखों में जलन या चुभन महसूस हो। ऐसा होने पर आप तुरंत आंखों को पानी से धो लें, इससे आपको राहत मिलेगी। 8. अगर आपकी आंखों में किसी एलर्जी की वजह से जलन हो रही है तो आप डॉक्टर से सलाह लें वह आपको एन्टी एलर्जिक दवा लिख सकते हैं। 9. खाने वाली दवाई और आंखों में डालने वाली दवाई दोनों अलग होती है। कभी-कभी खाने वाली दवाई से एलर्जी हो जाती है जिससे आंखें सुख जाती है और जलन होने लगती है। 10. अगर आपको लगता है कि आपके आंखों की जलन किसी दवाई की वजह से हो रही है या कोई साइड इफ़ेक्ट हो रहा है तो आप डॉक्टर से सलाह लें।
आंखों के डॉक्टर के पास जाने पर वह आपके मेडिकल हिस्ट्री तथा आंखों का परीक्षण करके ही, आपका इलाज करते हैं। डॉक्टर इस संबंध में निम्न परीक्षण कर सकते हैं- 1- संक्रमण के संकेत के अनुसार। 2- कॉर्नियल ऐब्रासेशन- अगर आपकी आंखों की तकलीफ कम नहीं हो रही है तब इस एंटीबायोटिक का प्रयोग किया जाता है, जो आंखों के जलन को कम करता है।
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